बुधवार, 8 सितंबर 2021

 डॉ. अमिताभ शुक्ल के काव्य संग्रह 'त्रासदियों का दौर' का हुआ लोकार्पण

भोपाल। राजधानी के हिंदी भवन, भोपाल में दिनांक 11 अगस्त 21 को वरिष्ठ कवि,लेखक एवं अर्थशास्त्री डॉ.अमिताभ शुक्ल के काव्य संग्रह 'त्रासदियों का दौर' का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्री नरेन्द्र दीपक, प्रख्यात विचारक श्री रघु ठाकुर, वरिष्ठ आलोचक डॉ.विजयबहादुर सिंह, तुलसी अकादमी के निदेशक डॉ. मोहन तिवारी आनंद, पूर्व अवर मुख्य सचिव, आईएएस एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री मनोज श्रीवास्तव, कला मंदिर  के सचिव श्री गोकुल सोनी, कवि एवम् लघु कथाकार श्री संत कुमार मालवीय 'संत' के साथ ही किताब के कवि, लेखक, अर्थशास्त्री डॉ. अमिताभ शुक्ल उपस्थित थे। इस दौरार कविता संग्रह पर चर्चा भी हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।

मंगलवार, 27 जुलाई 2021

मप्र साहित्य अकादमी तैयार कर रही साहित्यकार संदर्भ कोश

-प्रदेश के पच्चीस हजार से अधिक साहित्यकारों के जीवन वृत व उनका साहित्य रहेगा उपलब्ध

भोपाल। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का एक और नवाचार साहित्यकार संदर्भ कोष के रूप में सामने आ रहा है। इसे मप्र साहित्य अकादमी तैयार करने में जुटी है। मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास कुमार दवे ने बताया कि भोपाल ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के तमाम साहित्यकारों कलाकारों के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा संदर्भ कोष तैयार किया जा रहा है। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा एक महत्वकांक्षी परियोजना साहित्यकार संदर्भ कोष तैयार करने के लिए तकनीकी व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश के तमाम साहित्यकारों को एक लिंक पर खोजने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उन साहित्यकारों का समग्र साहित्य तथा जीवनवृत पाठकों के लिए नेट पर उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि साहित्यकारों का जीवन वृत्त तथा उनके क्रियाकलापों को एक फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉक्टर विकास दवे ने बताया कि इसके लिए महति परियोजना तैयार की जा रही है। साहित्यकारों को उपलब्ध लिंक के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। साथ ही अपनी तमाम जानकारी उन्हें जो फॉर्मेट दिया गया है उसमें डालनी होगी। इसके बाद में उसे वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी 1 वर्ष में हम सब मिलकर मध्य प्रदेश के लगभग 25 हजार से अधिक साहित्यकारों का डेटाबेस परिचय साहित्य अकादमी की वेबसाइट पर सहज रूप से देख सकेंगे।

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स्वयं ही वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे

निदेशक डॉ. दवे ने बताया कि इसके लिए https://mpsahityaacademy.com/ पर साहित्यकार संदर्भ कोष पंजीयन का आकार भी निर्धारित किया गया है ताकि साहित्यकार अपना परिचय स्वयं अपलोड कर सकेंगे और कॉलम में पूर्ति करके अपना परिचय जोड़ सकेंगे। इसके लिए पांच पेज जेपीजी फॉर्मेट में अलग से अटैच कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य बताते हुए कहा कि अभी तक हमारे देश में जिनको लोग नहीं जानते हैं कई साहित्यकार ऐसे उनका अच्छा साहित्य लोगों तक नहीं पहुंच पाया है तो इस महती योजना के माध्यम से कम से कम हम अपने प्रदेश के साहित्यकारों को इंटरनेट पर और साहित्य अकादमी के पेज पर उपलब्ध करवा दें ताकि यदि किसी को पढऩा है ढूंढना है तो वह एक ही प्लेटफार्म को ढूंढ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना तमाम साहित्यकारों के लिए जो दूर ग्रामीणों में निवास कर रहे हैं इसके साथ ही साथ महानगरों में भी हैं उनके लिए योजना बहुत ही कारगर सिद्ध होगी।

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सोमवार, 13 मई 2019

हर समस्या का समाधान है 'छोटू पेंटर' के पास: दुबे
बाल साहित्य को लेकर नोबेल मीडिया की कार्यशाला का हुआ समापन
महेश सोनी
भोपाल। 'छोटू पेंटर' एक कार्टून कैरेक्टर है जो आधुनिक परिवेश में जीवन के समन्वय और परिवार के सामंजस्य को लेकर बाल मनोवृत्ति पर केन्द्रित विजन है, इसमें छोटू बहुत ही बुद्धिमान और अपने दोस्तों का चहेता है। छोटू पेंटर अपने दोस्तों के साथ मिलकर समाज में आई हर तरह की समस्याओं का समाधान करता है। यह बात नोबेल मीडिया प्रा.लि. के प्रभारी संजीव दुबे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि यह नोबेल कंपनी बच्चों को आधुनिक परिवेश में स्वस्थ्य मनोरंजन के साथ ही पारिवारिक संस्कार, सामाजिक मूल्यों से जोडऩे के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रही है। गौरतलब है कि कंपनी द्वारा 'छोटू पेंटरÓ के रूप में एक ऐसा किरदार तैयार किया है जो सात-आठ साल का बच्चा है, आधुनिक परिवेश में रहकर वो उन तमाम बातों से परिचित होता है जो आज समाज में घट रही हैं। अनेक ऐसी विसंगतियां हैं जो बच्चों को मानसिक उन्नति के अवसर से वंचित रखे हुए हैं, कंपनी का उद्देश्य है कि बाल साहित्यकारों के लेखन के माध्यम से उन सभी घटनाओं को सामने लेकर अच्छी बातों को बच्चों के लिए प्रस्तुत किया जाए। इसी उद्देश्य को लेकर दो दिनी भोपाल में आयोजित कार्यशाला का आज समापन हुआ।
यह एक कंटेंट राइटिंग मीट है
              कार्यक्रम के संयोजक चंद्रभान राही ने बताया कि यह एक कंटेंट राइटिंग मीट है। इसमें शामिल सभी प्रतिभागियों ने चयनित विषयों तथा पहलुओं पर अपने आइडियाज प्रस्तुत किये। उन पर छोटे-छोटे कंटेंट तैयार किये और उन्हें बाल कहानी का रूप दिया। कार्यशाला में तैयार कहानी, कविताएं, नाटक पर सामूहिक रूप से चर्चा हुई और आगे की कार्ययोजना तैयार की गई। कार्यशाला में जिन प्रतिभागियों ने भाग लिया उनमें अरविंद शर्मा, कीर्ति श्रीवास्तव, साधना श्रीवास्तव, सीमा शिवहरे सुमन, महेश सोनी, सुधा तैलंग, हेमलता, सुनीता यादव, किरण खोड़के, दुर्गा श्रीवास्तव आदि शामिल थे। कोर मेंबर्स में चंद्रभान राही, डॉ. मोहम्मद आजम, डॉ. प्रीति प्रवीण खरे, इंदिरा त्रिवेदी शामिल थीं। अंत में सभी का आभार प्रदर्शन किया गया। 

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

बुंदेली सिनेमा को अभी और मजबूत करना है: राजा बुंदेला

खजुराहो फि ल्म महोत्सव 17 से 23 दिसंबर तक, शेखर कपूर का सम्मान

महेश सोनी


 प्रयास के संस्थापक व सुप्रसिद्ध अभिनेता,  राजा बुन्देला, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता व अन्य लोगों के साथ महेश सोनी।

भोपाल। हमारी संस्कृति और आंचलिकता को संरक्षित करने में फिल्मों का अहम योगदान है, खासकर बुंदेलखंड की कला और संस्कृति को विश्वस्तरीय सम्मान दिलाने में हमें अभी और अधिक काम करने की जरूरत है। यह बात प्रयास प्रोडक्शनस मुम्बई के संस्थापक व सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक राजा बुन्देला ने कही। उन्होंने बताया कि अभी बुंदेली सिनेमा को और मजबूत करने की जरूरत है, जहां तक भोजपुरी, बिहारी, हरियाणवी, राजस्थानी आदि भाषाओं ने सिनेमा में काफी जगह बनाई है, जबकि भोजपुरी का सौ साल का सिनेमा है, इसलिए हमें अभी इसके लिए अवसर तलाशने हैं। राजा बुंदेला छतरपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के संबंध में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने 17 से 23 दिसंबर तक आयोजित फिल्म समारोह में महिला सशक्तिकरण, किसानों को समर्पित तथा अन्य देसी थीम पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन की जानकारी दी। श्री बुंदेला ने विशेष चर्चा में कहा कि आजकल टपरा टॉकीज का चलन बंद हो गया है, जबकि यह हमारी ग्रामीण संस्कृति का परिचायक है, इसलिए समारोह में टपरा टॉकीज की भूमिका को रेखांकित करते हुए परंपरागत लुक के साथ फिल्म दिखाने की व्यवस्था भी की है। एक सवाल के जवाब में राजा बुंदेला ने कहा कि रेडियो से भी बुंदेली फिल्मों के गीत बजने चाहिए क्योंकि यह हमारी संस्कृति है, जिसे रेडियो के माध्यम से दूर-दूर तक पहुुंचाया जा सकता है, लेकिन आकाशवाणी केन्द्र में बुंदेली फिल्मों के सीडी नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए कहा कि हमारी कोशिश होगी कि निदेशालय से संपर्क कर बुंदेली फिल्मों के गीत की सीडियां उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि ग्रामीण कार्यक्रम में उन्हें बजाया जा सके। इसके अलावा बुंदेली के विकास और उत्थान के लिए फिल्मों के माध्यम से हर तरह के प्रयास करने पर श्री बुंदेला ने जोर दिया। फिल्म महोत्सव में शेखर कपूर का सम्मान किया जाएगा साथ ही अन्य फिल्मी कलाकारों तथा दुनियाभर के सिने हस्तियों को बुंदेलखंड से रूबरू कराने यह आयोजन किया जा रहा है। 

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

खबरों से समझौता नहीं करने वाले आज भी मौजूद

जश्ने उर्दू के तीसरे दिवस उर्दू सहाफत पर हुई संगोष्ठी, सहाफियों का हुआ इस्तकबाल

महेश सोनी

दूरदर्शन मप्र की प्रोग्राम आफिसर मोहतरमा हुस्ना कुरैशीजी के साथ वरिष्ठ पत्रकार व एंकर महेश सोनी

भोपाल। रविन्द्र भवन में तीन दिवसीय जश्ने उर्दू में आज अंतिम दिन उर्दू सहाफत पर संगोष्ठी हुई जिसमें शहर के जानेमाने पत्रकारों ने अपने विचार रखे। मुख्य वक्ताओं में महताब आलम, पंकज शुक्ला, अलीम बज्मी व शाहिद कामिल मौजूद थे। वरिष्ठ पत्रकार महताब आलम ने कहा कि यह आयोजन जबान का जश्र नहीं बल्कि तहजीब का जशन है। उर्दू केवल मुसलामानों की भाषा है यह कहना गलतफहमी है। उन्होंने बताया कि राजा राममोहन राया हिन्दुस्तानी सहाफत के बाबा आदम हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज पत्रकारिता के कल्चर पर उद्योगपतियों ने कब्जा कर लिया है, जिसके कारण आज स्तर में गिरावट आई है। इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार पंकज शुक्ला ने संगोष्ठी में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पहले अखबार निकालने के लिए मिशन की तैयारी होती थी, क्योंकि पहले संस्थान व्यक्ति बनाते थे, लेकिन अब व्यक्ति संस्थान बनाने लगा है। पत्रकारिता के संस्थान यह पढ़ा रहे हैं कि अखबार मे वह सब हों जो पाठकों को की रूचि का हो। जबकि वो सब होना चाहिए जो सच हो, इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है। उन्होने कहा कि ऐसे लोगों को हमें खारिज करना चाहिए ताकि हम वास्तविक प्रत्रकारिता के समीप आ जाएं। वरिष्ठ पत्रकार आरिफ मिर्जा ने कहा कि भोपाल उर्दू सहाफत का मरकज रहा है और उर्दू सभी की जुबान रही है। लेकिन सरकार द्वारा इसके लिए भी कुछ करना चाहिए। उन्होंने विद्यालयों में उर्दू विषय को भले ही एैच्छिक हो लागू करने की बात पर जोर दिया। इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार अलीम बज्मी ने भी खबरों की विश्वसनीयता के लिए पाठक नियामक आयोग तथा दर्शक नियामक आयोग बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आज खबर पालिका पर लोगों का भरोसा कम हो गया है और इसके लिए कोई आवाज भी नहीं उठाता, जबकि पहले कोई खबर गलत छप जाती थी तो पाठकों की चिट्ठी पहुंच जाती थी, जिसपर मीटिंग हुआ करती थी।

मुशायरे के साथ पत्रकारों का हुआ सम्मान

जश्रे उर्दू के दूसरे सत्र में मुशायरे का अयोजन किया जिसमें पत्रकारों शायरों ने अपने कलाम पेश किये, सबसे पहले सुधीर शर्मा ने अपनी गजल सुनाई इसके बाद सलीम तन्हा, महताब आलम ने आपनी गजलों से समा बांध दिया। इसी दौरान हिन्दुस्तान के सहैल बुखारी जो कि इन दिनों कतर में हैं उनका सम्मान किया गया। इसके बाद शहर के प्रमुख्य पत्रकारों का सम्मान किया गया। इस दौरान कौसर सिद्दीक़ी की पुस्तक मध्यप्रदेश में उर्दू शायरी की क़दामत (13वीं सदी से 18वीं सदी तक) का विमोचन हुआ। इधर मंच क्रमांक-2 से नई नस्ल में उर्दू विषय पर अंश हेप्पीनेस सोसायटी द्वारा महफिल लिट्रेरी ओपन माईक पर गज़़लों, गीतों पर आधारित सांगीतिक एकल-सामूहिक व बैण्ड प्रस्तुतियाँ हुईं जबकि मुख्य मंच से सांय 6:30 बजे विश्व विख्यात फिल्म डायरेक्टर व लेखक मुजफ़्फ़ऱ अली द्वारा जहान-ए-ख़ुसरो-सूफिय़ाना की प्रस्तुति, सूफिय़ाना कथक-आस्था दीक्षित, काव्यात्मक प्रस्तुति-मुराद अली द्वारा एवं रूबरू के अन्तर्गत मुजफ़्फ़ऱ अली से चर्चा व विश्वख्यिात शायर असलम साबरी और साथी, जयपुर द्वारा सूफिय़ाना क़व्वालियों की प्रस्तुति हुईं। 

सोमवार, 27 नवंबर 2017

सकारात्मक लेखन से बेटियों का हौंसला बढ़ाएं: शर्मा

सकारात्मक लेखन से बेटियों का हौंसला बढ़ाएं: शर्मा

सरोकार द्वारा आयोजित कविता एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के वितरित किए पुरस्कार

फोटो केप्शन: सरोकार द्वारा आयोजित कविता लेखन प्रतियोगिता में वरिष्ठ पत्रकार महेश सोनी को द्वितीय पुरस्कार प्रदान करते हुए अतिथिगण। 



भोपाल। अब बेटियों के प्रति नकारात्मक लिखना बंद करें और सकारात्मक लिखकर बेटियों का हौंसला बढ़ाएं। यह बात सरोकार द्वारा आयोजित कविता एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी व फिल्मकार मुकेश शर्मा ने कही। रविवार को लैंगिक समानता के लिए प्रतिबद्ध संस्थान सरोकार द्वारा हिंदी भवन में कविता एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक डॉक्टर सुरेश तोमर, प्रख्यात रंगकर्मी एवं फिल्मकार मुकेश शर्मा एवं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, माध्यम और वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र पाल सिंह भी मौजूद रहे। वहीं विशेष रूप से किन्नर समाज कल्याण समिति की अध्यक्ष देवी रानी भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में सरोकार की सक्रिय कार्यकर्ता व दिल्ली विवि की छात्रा यशस्वी कुमुद ने बेटियों के स्वाभिमान को जगाते हुए गीत प्रस्तुत किए जिनमें पहला गीता 'दी वक्त ने चेतावनी हमने नहीं मानी, लगता है जैसे बह गया हर आंख का पानी और दूसरा गीत बाबुल जिया मोर घबराए जैसे गीतों के जरिए कार्यक्रम में स्फूर्ति प्रदान की। के अंत में सरोकार द्वारा सिक्सटीन डेज एक्टिविज्म के अंतर्गत 'मैं भईया से बात करूंगी और 'तुमसे वादा है मेरा जैसे दो सोशल मीडिया कैम्पेन की भी घोषणा की गई। इन कैंपेन के जरिए महिला हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।

संपत्ति में बेटी का हिस्सा होना चाहिए

कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के अध्यक्ष प्रो. वीपी सिंह ने संस्थान के कार्यों की जानकारी देकर की। इसके बाद कार्यक्रम में डॉ. सुरेश तोमर ने जेंडर ईक्वेलिटी के बारे में लोगों को जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने कई आंकड़े बताकर पितृ सत्तात्मक को खत्म करने की बात कही और कहा कि जिस दिन संपत्ति में बेटियों को हिस्सा देना शुरु कर देंगे, उस दिन काफी हद तक महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा खत्म हो जाएगी। वहीं इस मौके पर पीपीसिंह ने कहा कि हमें कुछ इसी तरह से घर-घर पहुंचने की जरूरत है क्योंकि ये बुराई घर-घर में जमी हुई बुराई है। इसे जड़ से उखाडऩे में वक्त लगेगा, मेहनत करते रहें और सकारात्मक बने रहें।

समाज में बदलाव लाएंगी देवी रानी

इस मौके पर संस्थान द्वारा किन्नर देवी रानी को शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया जिसके जरिए समाज में थर्ड जेंडर को भी बराबरी देने की बात की गई। इस मौके पर उन्होंने बताया कि बेटी के जन्म पर लोगों की किस तरह से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं रहती हैं इसलिए वे इस अभियान से जुड़कर समाज में बदलाव लाना चाहती है। इसके साथ ही 20 वर्षीय लॉ की छात्र बैतूल की सुनीत अंबुलकर जिन्होंने महिला अधिकारों पर किताब लिखी है, उन्हें भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर अपने क्षेत्र में बेटियों को बढ़ावा देने के लिए जयंति जैन, समीर खान और शहनाज को भी सशक्त साथी सम्मान दिया गया।

ये रहे प्रतियोगिता के विजेता

कार्यक्रम में कविता प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार अंकित पाण्डेय को, द्वितीय पुरस्कार महेश सोनी को तथा तृतीय पुरस्कार शिवेंद्र कुमार मिश्रा को प्रदान किया गया। जबकि  फोटोग्राफी प्रतियोगिता के टॉप 5 विजेताओं में मुक्तेशी पटेल, ईशा आरूषि, अंकित त्रिपाठी, दीक्षा पुरोहित तथा मानसी सोनकर को पुरस्कार राशि, पशस्तीपत्र तथा स्मृति चिन्ह अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन कुमुद सिंह ने किया। 


मंगलवार, 21 नवंबर 2017

प्रदर्शनी में दिखाया लौह पुरूष का जीवन समग्र


विज्ञान केन्द्र में 'एक भारत: सरदार पटेल'  प्रदर्शनी ह लोकप्रिय

महेश सोनी

भोपाल। आंचलिक विज्ञान केन्द्र में लगी सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन समग्र पर आधारित प्रदर्शनी लोगों के बहुत ही संदेशप्रद और ज्ञानवर्धक है। इससे बहुत कुछ सीखने का मिलता है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की एक परियोजना के अंतर्गत, 31 अक्टूबर 2017 को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल में 'एक भारत: सरदार पटेल' नामक डिजिटल प्रदर्शनी लगाई गई है। जिसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सरदार पटेल के जीवन वृत को विभिन्न आयामों से दिखाने की कोशिश पूरी तरह से सफल रही है। यह प्रदर्शनी ना सिर्फ भोपाल बल्कि मध्य प्रदेश के सुदूर अंचलों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों सहित अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि लोग सरदार पटेल के देश हित में मिए गए कार्यों को भलिभांति समझ सकें । इस डिजिटल प्रदर्शनी में भारत के एकीकरण में सरदार पटेल के योगदान के बारे में बताया गया है और इसका निर्माण माननीय प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन से हुआ है। गौरतलब है कि इस प्रदर्शनी का उद्घाटन राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली में वर्ष 2016 में इसी दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था जिसकी पहली वर्षगाँठ आंचलिक विज्ञान केंद्र, भोपाल में मनाई जा रही है। उद्घाटन समारोह में मंत्री उमाशंकर गुप्ता के अलावा डॉ. नवीन चंद्रा, महानिदेशक, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, प्रबाल रॉय, प्रकल्प समन्वयक, आंचलिक विज्ञान केंद्र, भोपाल आदि उपस्थित थे।

दुर्लभ जानकारी शामिल

यह प्रदर्शनी सरदार पटेल द्वारा एकीकृत एवं लोकतान्त्रिक भारत के निर्माण में किये गए अथक प्रयासों को एक श्रद्धांजलि है। यह प्रदर्शनी सरदार पटेल द्वारा भारत को एकीकृत करने के लिए किये गए वृहद् प्रयासों का सन्देश देती है। इस प्रदर्शनी में कुछ दुर्लभ जानकारियां और सामग्रियां हैं, जिन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार के अभिलेखों से प्राप्त किया गया है। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् द्वारा निर्मित एवं राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान अहमदाबाद द्वारा डिज़ाइन की गई है। इस प्रदर्शनी में लगभग 50 प्रादर्श एवं20 विभिन्न तरह के संवादात्मक यंत्र हैं ढ्ढ यह प्रदर्शनी दर्शकों को विभिन्न डिजिटल प्रादर्शों से मुखातिब होने का मौका देती है, जो भारत को एकीकृत करने में सरदार पटेल के प्रयासों को समझाते हैं। इस प्रदर्शनी में कई तकनीकों जैसे 3डी फिल्म्स (बिना चश्मे के), होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, काइनेटिक प्रोजेक्शन, आक्युलस आधारित आभासी वास्तविकता आदि का प्रयोग किया गया है ढ्ढ अभिलेखों के अंतर्गत राष्ट्र को एकीकृत करने में सरदार पटेल की भूमिका के परिणामस्वरूप भारत संघ में रियासतों को सम्मिलित करने हेतु विभिन्न रियासतों द्वारा हस्ताक्षरित विलय पत्रों को इस प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। केंद्र में यह प्रदर्शनी 31 अक्टूबर से 30 नवम्बर 2017 तक आम जनता के लिए उपलब्ध रहेगी। सभी छात्रों एवं लोगों को इस प्रदर्शनी का अवलोकन अवश्य करना चाहिए। 

स्टेचू के साथ फोटो खिंचाने की ललक

आंचलिक विज्ञान संग्रहालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का कक्ष जिसमें वे कुर्सी पर बैठे हुए अपनी सामने फाईल में रखे कागजों को देखकर कुछ इशारा कर रहे हैं। हूबहू उनका स्टेचू सभी के लिए बहुत ही कौतूहल और आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। हर कोई यहां आकर कक्ष के सामने खड़े होकर फोटो खिंचाने की ललक लिए देखा जा सकता है। वाकई यह जगह है ही ऐसी, और फिर सरदार पटेल का आकर्षण हर किसी को अपनी ओर बुला रहा है। हम भी पहुंच गए और एक फोटो खिंचा ली। इसके साथ ही एक जगह एसी भी है जहां आप माइक पर सरदार पटेल जी से प्रश्न पूछ सकते हैं और वे तुरंत आपको उत्तर भी देते हुए दिखाई दे जाएंगे। वाकई काबिले तारीफ है यह प्रदर्शनी।