बुधवार, 12 जनवरी 2022

75 युवाओं को पुस्तक लेखन के लिए मिलेंगे पचास हजार रुपये

 साहित्य अकादमी का युवा दिवस पर तोहफा 

योजना को मूर्त रूप देने सीएम व संस्कृति मंत्री ने दी स्वीकृति, युवा रचनाकारों के लिए अभिवन योजना

महेश सोनी

भोपाल। स्वामी विवेकानंद जयंती अर्थात अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर मप्र साहित्य अकादमी ने युवाओं को एक बड़ा तोहफा दिया है। मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि एक लंबे समय से हमारी कोशिश थी कि युवाओं के लिए रचनात्मक अभिव्यक्ति को मुखरित करने के लिए कुछ ऐसा प्रयास किया जाये जिससे उन्हें रचनाकर्म के प्रति अनुराग उत्पन्न हों और वे अपने सृजन को पुस्तक के रूप में साकार कर सकें। डॉ. दवे ने बताया कि यह अपेक्षित शुभ समाचार आज आप सब तक पहुंचाते हुए मुुझे स्वयं भी आनंद की अनुभूति हो रही है। हम सब जानते हैं स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के संदर्भ में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश युवा रचनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को मूर्त रूप देना चाहती थी। उस योजना को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि आज युवा दिवस पर ही इस योजना की घोषणा करते हुए मैं अपने जीवन की धन्यता अनुभव कर रहा हूं। हम  75 युवा रचनाकारों को पुस्तक लेखन हेतु चयन करेंगे। जिसके लिए प्रत्येक को छात्रवृत्ति के रूप में 50 हजार रुपये की राशि देंगे, साथ ही पांडुलिपि का चयन करके अकादमी के माध्यम से प्रकाशित भी करेंगे।

30 वर्ष तक की आयु के युवा होंगे शामिल 

अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने राजनीतिक क्रांति को बताया कि संपूर्ण मध्यप्रदेश के युवाओं को इसमें शामिल किया जा रहा है जो कि 30 वर्ष की आयु निर्धारित है। इसके लिए प्रपत्र के नियमों को समझकर साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के पते पर अपनी पुस्तक की पूर्व योजना (सिनॉप्सिस) 5000 शब्दों में बनाकर प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद यदि वे चयनित होते हैं तो प्रत्येक को 50,000 (पचास हजार रु) छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किए जायेंगे। साथ ही उनकी पुस्तक का प्रकाशन भी साहित्य अकादमी करेगी। इस अभिनव योजना को साकार रूप देने के लिए उन्होंने विशेष आभार शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं अदिति कुमार त्रिपाठी, संचालक संस्कृति संचालनालय के प्रति भी व्यक्त किया है। 

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बुधवार, 8 दिसंबर 2021

लता स्वरांजली, रामकिशोर शर्मा, बिहारीलाल, संत कुमार समेत अन्य रचनाकारों का होगा सम्मान

मप्र नव लेखन संघ के अलंकरण घोषित, 19 को होगा सम्मान समारोह

भोपाल। मप्र नव लेखन संघ साहित्यिक संस्था द्वारा वर्ष 2020 एवं 2021 के लिए विभिन्न सृजनधर्मियो को प्रदान किये जाने वाले अलंकरण दिनांक 19 दिसंबर 2021 को दुष्यंत संग्रहालय सभागार भोपाल में आयोजित समारोह में प्रदान किये जाएंगे। उक्त जानकारी देते हुए संस्था के संरक्षक बिहारी लाल सोनी अनुज एवं संस्थापक अध्यक्ष प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष 2020 के लिए संवाद सेवा भारती अलंकरण वरिष्ठ पत्रकार राजेश चंचल को प्रदान किया जाएगा एवं इसी क्रम में रामकिशोर शर्मा गुरुजी को विश्व सेवा भारती अलंकरण तथा बिहारीलाल सोनी अनुज संत कुमार मालवीय श्रीमती आशा श्रीवास्तव अमित दीवान को अटल राजभाषा अलंकरण व कमल किशोर दुबे, सुदामा दुबे वाबरी सुरेश जायसवाल संजय सिंह प्रो. अर्जुन दास खत्री को राजभाषा शिखर अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार अलंकरण की श्रृंखला में वर्ष 2021 का राजभाषा शिखर अलंकरण डा. किशन तिवारी, डा. अशोक तिवारी अमन तथा अशोक धमनियां को और श्रीमती प्रमिला झरबड़े कृष्णदेव चतुर्वेदी डा. लता स्वरांजलि दिनेश गुप्ता मकरंद व शैलेन्द्र प्रताप सिंह राजपूत को अटल राजभाषा अलंकरण तथा पत्रकार सालार गौरी व जवाहर सिंह को संवाद सेवा भारती अलंकरण व समाजसेवी श्रीमती आशा सी एल साहू को विश्व सेवा भारती अलंकरण प्रदान किया जाएगा। 

बुधवार, 8 सितंबर 2021

 डॉ. अमिताभ शुक्ल के काव्य संग्रह 'त्रासदियों का दौर' का हुआ लोकार्पण

भोपाल। राजधानी के हिंदी भवन, भोपाल में दिनांक 11 अगस्त 21 को वरिष्ठ कवि,लेखक एवं अर्थशास्त्री डॉ.अमिताभ शुक्ल के काव्य संग्रह 'त्रासदियों का दौर' का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ गीतकार श्री नरेन्द्र दीपक, प्रख्यात विचारक श्री रघु ठाकुर, वरिष्ठ आलोचक डॉ.विजयबहादुर सिंह, तुलसी अकादमी के निदेशक डॉ. मोहन तिवारी आनंद, पूर्व अवर मुख्य सचिव, आईएएस एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री मनोज श्रीवास्तव, कला मंदिर  के सचिव श्री गोकुल सोनी, कवि एवम् लघु कथाकार श्री संत कुमार मालवीय 'संत' के साथ ही किताब के कवि, लेखक, अर्थशास्त्री डॉ. अमिताभ शुक्ल उपस्थित थे। इस दौरार कविता संग्रह पर चर्चा भी हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।

मंगलवार, 27 जुलाई 2021

मप्र साहित्य अकादमी तैयार कर रही साहित्यकार संदर्भ कोश

-प्रदेश के पच्चीस हजार से अधिक साहित्यकारों के जीवन वृत व उनका साहित्य रहेगा उपलब्ध

भोपाल। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का एक और नवाचार साहित्यकार संदर्भ कोष के रूप में सामने आ रहा है। इसे मप्र साहित्य अकादमी तैयार करने में जुटी है। मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास कुमार दवे ने बताया कि भोपाल ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के तमाम साहित्यकारों कलाकारों के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा संदर्भ कोष तैयार किया जा रहा है। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा एक महत्वकांक्षी परियोजना साहित्यकार संदर्भ कोष तैयार करने के लिए तकनीकी व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश के तमाम साहित्यकारों को एक लिंक पर खोजने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उन साहित्यकारों का समग्र साहित्य तथा जीवनवृत पाठकों के लिए नेट पर उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि साहित्यकारों का जीवन वृत्त तथा उनके क्रियाकलापों को एक फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉक्टर विकास दवे ने बताया कि इसके लिए महति परियोजना तैयार की जा रही है। साहित्यकारों को उपलब्ध लिंक के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। साथ ही अपनी तमाम जानकारी उन्हें जो फॉर्मेट दिया गया है उसमें डालनी होगी। इसके बाद में उसे वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी 1 वर्ष में हम सब मिलकर मध्य प्रदेश के लगभग 25 हजार से अधिक साहित्यकारों का डेटाबेस परिचय साहित्य अकादमी की वेबसाइट पर सहज रूप से देख सकेंगे।

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स्वयं ही वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे

निदेशक डॉ. दवे ने बताया कि इसके लिए https://mpsahityaacademy.com/ पर साहित्यकार संदर्भ कोष पंजीयन का आकार भी निर्धारित किया गया है ताकि साहित्यकार अपना परिचय स्वयं अपलोड कर सकेंगे और कॉलम में पूर्ति करके अपना परिचय जोड़ सकेंगे। इसके लिए पांच पेज जेपीजी फॉर्मेट में अलग से अटैच कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य बताते हुए कहा कि अभी तक हमारे देश में जिनको लोग नहीं जानते हैं कई साहित्यकार ऐसे उनका अच्छा साहित्य लोगों तक नहीं पहुंच पाया है तो इस महती योजना के माध्यम से कम से कम हम अपने प्रदेश के साहित्यकारों को इंटरनेट पर और साहित्य अकादमी के पेज पर उपलब्ध करवा दें ताकि यदि किसी को पढऩा है ढूंढना है तो वह एक ही प्लेटफार्म को ढूंढ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना तमाम साहित्यकारों के लिए जो दूर ग्रामीणों में निवास कर रहे हैं इसके साथ ही साथ महानगरों में भी हैं उनके लिए योजना बहुत ही कारगर सिद्ध होगी।

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सोमवार, 13 मई 2019

हर समस्या का समाधान है 'छोटू पेंटर' के पास: दुबे
बाल साहित्य को लेकर नोबेल मीडिया की कार्यशाला का हुआ समापन
महेश सोनी
भोपाल। 'छोटू पेंटर' एक कार्टून कैरेक्टर है जो आधुनिक परिवेश में जीवन के समन्वय और परिवार के सामंजस्य को लेकर बाल मनोवृत्ति पर केन्द्रित विजन है, इसमें छोटू बहुत ही बुद्धिमान और अपने दोस्तों का चहेता है। छोटू पेंटर अपने दोस्तों के साथ मिलकर समाज में आई हर तरह की समस्याओं का समाधान करता है। यह बात नोबेल मीडिया प्रा.लि. के प्रभारी संजीव दुबे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि यह नोबेल कंपनी बच्चों को आधुनिक परिवेश में स्वस्थ्य मनोरंजन के साथ ही पारिवारिक संस्कार, सामाजिक मूल्यों से जोडऩे के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रही है। गौरतलब है कि कंपनी द्वारा 'छोटू पेंटरÓ के रूप में एक ऐसा किरदार तैयार किया है जो सात-आठ साल का बच्चा है, आधुनिक परिवेश में रहकर वो उन तमाम बातों से परिचित होता है जो आज समाज में घट रही हैं। अनेक ऐसी विसंगतियां हैं जो बच्चों को मानसिक उन्नति के अवसर से वंचित रखे हुए हैं, कंपनी का उद्देश्य है कि बाल साहित्यकारों के लेखन के माध्यम से उन सभी घटनाओं को सामने लेकर अच्छी बातों को बच्चों के लिए प्रस्तुत किया जाए। इसी उद्देश्य को लेकर दो दिनी भोपाल में आयोजित कार्यशाला का आज समापन हुआ।
यह एक कंटेंट राइटिंग मीट है
              कार्यक्रम के संयोजक चंद्रभान राही ने बताया कि यह एक कंटेंट राइटिंग मीट है। इसमें शामिल सभी प्रतिभागियों ने चयनित विषयों तथा पहलुओं पर अपने आइडियाज प्रस्तुत किये। उन पर छोटे-छोटे कंटेंट तैयार किये और उन्हें बाल कहानी का रूप दिया। कार्यशाला में तैयार कहानी, कविताएं, नाटक पर सामूहिक रूप से चर्चा हुई और आगे की कार्ययोजना तैयार की गई। कार्यशाला में जिन प्रतिभागियों ने भाग लिया उनमें अरविंद शर्मा, कीर्ति श्रीवास्तव, साधना श्रीवास्तव, सीमा शिवहरे सुमन, महेश सोनी, सुधा तैलंग, हेमलता, सुनीता यादव, किरण खोड़के, दुर्गा श्रीवास्तव आदि शामिल थे। कोर मेंबर्स में चंद्रभान राही, डॉ. मोहम्मद आजम, डॉ. प्रीति प्रवीण खरे, इंदिरा त्रिवेदी शामिल थीं। अंत में सभी का आभार प्रदर्शन किया गया। 

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

बुंदेली सिनेमा को अभी और मजबूत करना है: राजा बुंदेला

खजुराहो फि ल्म महोत्सव 17 से 23 दिसंबर तक, शेखर कपूर का सम्मान

महेश सोनी


 प्रयास के संस्थापक व सुप्रसिद्ध अभिनेता,  राजा बुन्देला, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता व अन्य लोगों के साथ महेश सोनी।

भोपाल। हमारी संस्कृति और आंचलिकता को संरक्षित करने में फिल्मों का अहम योगदान है, खासकर बुंदेलखंड की कला और संस्कृति को विश्वस्तरीय सम्मान दिलाने में हमें अभी और अधिक काम करने की जरूरत है। यह बात प्रयास प्रोडक्शनस मुम्बई के संस्थापक व सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक राजा बुन्देला ने कही। उन्होंने बताया कि अभी बुंदेली सिनेमा को और मजबूत करने की जरूरत है, जहां तक भोजपुरी, बिहारी, हरियाणवी, राजस्थानी आदि भाषाओं ने सिनेमा में काफी जगह बनाई है, जबकि भोजपुरी का सौ साल का सिनेमा है, इसलिए हमें अभी इसके लिए अवसर तलाशने हैं। राजा बुंदेला छतरपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के संबंध में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने 17 से 23 दिसंबर तक आयोजित फिल्म समारोह में महिला सशक्तिकरण, किसानों को समर्पित तथा अन्य देसी थीम पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन की जानकारी दी। श्री बुंदेला ने विशेष चर्चा में कहा कि आजकल टपरा टॉकीज का चलन बंद हो गया है, जबकि यह हमारी ग्रामीण संस्कृति का परिचायक है, इसलिए समारोह में टपरा टॉकीज की भूमिका को रेखांकित करते हुए परंपरागत लुक के साथ फिल्म दिखाने की व्यवस्था भी की है। एक सवाल के जवाब में राजा बुंदेला ने कहा कि रेडियो से भी बुंदेली फिल्मों के गीत बजने चाहिए क्योंकि यह हमारी संस्कृति है, जिसे रेडियो के माध्यम से दूर-दूर तक पहुुंचाया जा सकता है, लेकिन आकाशवाणी केन्द्र में बुंदेली फिल्मों के सीडी नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए कहा कि हमारी कोशिश होगी कि निदेशालय से संपर्क कर बुंदेली फिल्मों के गीत की सीडियां उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि ग्रामीण कार्यक्रम में उन्हें बजाया जा सके। इसके अलावा बुंदेली के विकास और उत्थान के लिए फिल्मों के माध्यम से हर तरह के प्रयास करने पर श्री बुंदेला ने जोर दिया। फिल्म महोत्सव में शेखर कपूर का सम्मान किया जाएगा साथ ही अन्य फिल्मी कलाकारों तथा दुनियाभर के सिने हस्तियों को बुंदेलखंड से रूबरू कराने यह आयोजन किया जा रहा है। 

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

खबरों से समझौता नहीं करने वाले आज भी मौजूद

जश्ने उर्दू के तीसरे दिवस उर्दू सहाफत पर हुई संगोष्ठी, सहाफियों का हुआ इस्तकबाल

महेश सोनी

दूरदर्शन मप्र की प्रोग्राम आफिसर मोहतरमा हुस्ना कुरैशीजी के साथ वरिष्ठ पत्रकार व एंकर महेश सोनी

भोपाल। रविन्द्र भवन में तीन दिवसीय जश्ने उर्दू में आज अंतिम दिन उर्दू सहाफत पर संगोष्ठी हुई जिसमें शहर के जानेमाने पत्रकारों ने अपने विचार रखे। मुख्य वक्ताओं में महताब आलम, पंकज शुक्ला, अलीम बज्मी व शाहिद कामिल मौजूद थे। वरिष्ठ पत्रकार महताब आलम ने कहा कि यह आयोजन जबान का जश्र नहीं बल्कि तहजीब का जशन है। उर्दू केवल मुसलामानों की भाषा है यह कहना गलतफहमी है। उन्होंने बताया कि राजा राममोहन राया हिन्दुस्तानी सहाफत के बाबा आदम हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज पत्रकारिता के कल्चर पर उद्योगपतियों ने कब्जा कर लिया है, जिसके कारण आज स्तर में गिरावट आई है। इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार पंकज शुक्ला ने संगोष्ठी में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पहले अखबार निकालने के लिए मिशन की तैयारी होती थी, क्योंकि पहले संस्थान व्यक्ति बनाते थे, लेकिन अब व्यक्ति संस्थान बनाने लगा है। पत्रकारिता के संस्थान यह पढ़ा रहे हैं कि अखबार मे वह सब हों जो पाठकों को की रूचि का हो। जबकि वो सब होना चाहिए जो सच हो, इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है। उन्होने कहा कि ऐसे लोगों को हमें खारिज करना चाहिए ताकि हम वास्तविक प्रत्रकारिता के समीप आ जाएं। वरिष्ठ पत्रकार आरिफ मिर्जा ने कहा कि भोपाल उर्दू सहाफत का मरकज रहा है और उर्दू सभी की जुबान रही है। लेकिन सरकार द्वारा इसके लिए भी कुछ करना चाहिए। उन्होंने विद्यालयों में उर्दू विषय को भले ही एैच्छिक हो लागू करने की बात पर जोर दिया। इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार अलीम बज्मी ने भी खबरों की विश्वसनीयता के लिए पाठक नियामक आयोग तथा दर्शक नियामक आयोग बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आज खबर पालिका पर लोगों का भरोसा कम हो गया है और इसके लिए कोई आवाज भी नहीं उठाता, जबकि पहले कोई खबर गलत छप जाती थी तो पाठकों की चिट्ठी पहुंच जाती थी, जिसपर मीटिंग हुआ करती थी।

मुशायरे के साथ पत्रकारों का हुआ सम्मान

जश्रे उर्दू के दूसरे सत्र में मुशायरे का अयोजन किया जिसमें पत्रकारों शायरों ने अपने कलाम पेश किये, सबसे पहले सुधीर शर्मा ने अपनी गजल सुनाई इसके बाद सलीम तन्हा, महताब आलम ने आपनी गजलों से समा बांध दिया। इसी दौरान हिन्दुस्तान के सहैल बुखारी जो कि इन दिनों कतर में हैं उनका सम्मान किया गया। इसके बाद शहर के प्रमुख्य पत्रकारों का सम्मान किया गया। इस दौरान कौसर सिद्दीक़ी की पुस्तक मध्यप्रदेश में उर्दू शायरी की क़दामत (13वीं सदी से 18वीं सदी तक) का विमोचन हुआ। इधर मंच क्रमांक-2 से नई नस्ल में उर्दू विषय पर अंश हेप्पीनेस सोसायटी द्वारा महफिल लिट्रेरी ओपन माईक पर गज़़लों, गीतों पर आधारित सांगीतिक एकल-सामूहिक व बैण्ड प्रस्तुतियाँ हुईं जबकि मुख्य मंच से सांय 6:30 बजे विश्व विख्यात फिल्म डायरेक्टर व लेखक मुजफ़्फ़ऱ अली द्वारा जहान-ए-ख़ुसरो-सूफिय़ाना की प्रस्तुति, सूफिय़ाना कथक-आस्था दीक्षित, काव्यात्मक प्रस्तुति-मुराद अली द्वारा एवं रूबरू के अन्तर्गत मुजफ़्फ़ऱ अली से चर्चा व विश्वख्यिात शायर असलम साबरी और साथी, जयपुर द्वारा सूफिय़ाना क़व्वालियों की प्रस्तुति हुईं।