शनिवार, 9 अप्रैल 2022
मंगलवार, 15 मार्च 2022
बुधवार, 12 जनवरी 2022
75 युवाओं को पुस्तक लेखन के लिए मिलेंगे पचास हजार रुपये
साहित्य अकादमी का युवा दिवस पर तोहफा
योजना को मूर्त रूप देने सीएम व संस्कृति मंत्री ने दी स्वीकृति, युवा रचनाकारों के लिए अभिवन योजना
महेश सोनी
भोपाल। स्वामी विवेकानंद जयंती अर्थात अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर मप्र साहित्य अकादमी ने युवाओं को एक बड़ा तोहफा दिया है। मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि एक लंबे समय से हमारी कोशिश थी कि युवाओं के लिए रचनात्मक अभिव्यक्ति को मुखरित करने के लिए कुछ ऐसा प्रयास किया जाये जिससे उन्हें रचनाकर्म के प्रति अनुराग उत्पन्न हों और वे अपने सृजन को पुस्तक के रूप में साकार कर सकें। डॉ. दवे ने बताया कि यह अपेक्षित शुभ समाचार आज आप सब तक पहुंचाते हुए मुुझे स्वयं भी आनंद की अनुभूति हो रही है। हम सब जानते हैं स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के संदर्भ में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश युवा रचनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को मूर्त रूप देना चाहती थी। उस योजना को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि आज युवा दिवस पर ही इस योजना की घोषणा करते हुए मैं अपने जीवन की धन्यता अनुभव कर रहा हूं। हम 75 युवा रचनाकारों को पुस्तक लेखन हेतु चयन करेंगे। जिसके लिए प्रत्येक को छात्रवृत्ति के रूप में 50 हजार रुपये की राशि देंगे, साथ ही पांडुलिपि का चयन करके अकादमी के माध्यम से प्रकाशित भी करेंगे।
30 वर्ष तक की आयु के युवा होंगे शामिल
अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने राजनीतिक क्रांति को बताया कि संपूर्ण मध्यप्रदेश के युवाओं को इसमें शामिल किया जा रहा है जो कि 30 वर्ष की आयु निर्धारित है। इसके लिए प्रपत्र के नियमों को समझकर साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के पते पर अपनी पुस्तक की पूर्व योजना (सिनॉप्सिस) 5000 शब्दों में बनाकर प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद यदि वे चयनित होते हैं तो प्रत्येक को 50,000 (पचास हजार रु) छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किए जायेंगे। साथ ही उनकी पुस्तक का प्रकाशन भी साहित्य अकादमी करेगी। इस अभिनव योजना को साकार रूप देने के लिए उन्होंने विशेष आभार शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं अदिति कुमार त्रिपाठी, संचालक संस्कृति संचालनालय के प्रति भी व्यक्त किया है।
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बुधवार, 8 दिसंबर 2021
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मंगलवार, 27 जुलाई 2021
मप्र साहित्य अकादमी तैयार कर रही साहित्यकार संदर्भ कोश
-प्रदेश के पच्चीस हजार से अधिक साहित्यकारों के जीवन वृत व उनका साहित्य रहेगा उपलब्ध
भोपाल। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का एक और नवाचार साहित्यकार संदर्भ कोष के रूप में सामने आ रहा है। इसे मप्र साहित्य अकादमी तैयार करने में जुटी है। मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास कुमार दवे ने बताया कि भोपाल ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के तमाम साहित्यकारों कलाकारों के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा संदर्भ कोष तैयार किया जा रहा है। साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा एक महत्वकांक्षी परियोजना साहित्यकार संदर्भ कोष तैयार करने के लिए तकनीकी व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश के तमाम साहित्यकारों को एक लिंक पर खोजने के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उन साहित्यकारों का समग्र साहित्य तथा जीवनवृत पाठकों के लिए नेट पर उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि साहित्यकारों का जीवन वृत्त तथा उनके क्रियाकलापों को एक फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉक्टर विकास दवे ने बताया कि इसके लिए महति परियोजना तैयार की जा रही है। साहित्यकारों को उपलब्ध लिंक के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। साथ ही अपनी तमाम जानकारी उन्हें जो फॉर्मेट दिया गया है उसमें डालनी होगी। इसके बाद में उसे वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी 1 वर्ष में हम सब मिलकर मध्य प्रदेश के लगभग 25 हजार से अधिक साहित्यकारों का डेटाबेस परिचय साहित्य अकादमी की वेबसाइट पर सहज रूप से देख सकेंगे।
बाक्सस्वयं ही वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे
निदेशक डॉ. दवे ने बताया कि इसके लिए https://mpsahityaacademy.com/ पर साहित्यकार संदर्भ कोष पंजीयन का आकार भी निर्धारित किया गया है ताकि साहित्यकार अपना परिचय स्वयं अपलोड कर सकेंगे और कॉलम में पूर्ति करके अपना परिचय जोड़ सकेंगे। इसके लिए पांच पेज जेपीजी फॉर्मेट में अलग से अटैच कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य बताते हुए कहा कि अभी तक हमारे देश में जिनको लोग नहीं जानते हैं कई साहित्यकार ऐसे उनका अच्छा साहित्य लोगों तक नहीं पहुंच पाया है तो इस महती योजना के माध्यम से कम से कम हम अपने प्रदेश के साहित्यकारों को इंटरनेट पर और साहित्य अकादमी के पेज पर उपलब्ध करवा दें ताकि यदि किसी को पढऩा है ढूंढना है तो वह एक ही प्लेटफार्म को ढूंढ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह योजना तमाम साहित्यकारों के लिए जो दूर ग्रामीणों में निवास कर रहे हैं इसके साथ ही साथ महानगरों में भी हैं उनके लिए योजना बहुत ही कारगर सिद्ध होगी।
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